19 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण सामाजिक और व्यावसायिक मुद्दे पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) से विचार करने को कहा कि क्या आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित पृष्ठभूमि से आने वाले अभ्यर्थियों को ऑल इंडिया बार एग्जाम (AIBE) के परीक्षा शुल्क से छूट दी जा सकती है। कोर्ट ने यह सुझाव एक याचिका की सुनवाई के दौरान दिया जिसमें यह मुद्दा उठाया गया था कि AIBE की परीक्षा फीस कई गरीब कानून स्नातकों के लिए एक बड़ी आर्थिक बाधा बन रही है।
इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने टिप्पणी की कि वकालत एक ऐसा पेशा है जिसे समाज के हर वर्ग से लोगों को अपनाने का अवसर मिलना चाहिए, न कि केवल आर्थिक रूप से सक्षम लोगों को। कोर्ट ने BCI से कहा कि वह इस विषय में नीतिगत निर्णय ले और यह सुनिश्चित करे कि आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए वकालत के पेशे के द्वार बंद न हों।
याचिका में यह भी बताया गया था कि AIBE की परीक्षा में शामिल होने के लिए वर्तमान में ₹3,500 से ₹5,000 तक का शुल्क लिया जाता है, जो देश के दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले कई अभ्यर्थियों के लिए वहन करना कठिन है। यह शुल्क उन्हें वकालत के पंजीकरण में बाधक बन रहा है, जिससे उनके भविष्य पर सीधा असर पड़ता है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि देश में सामाजिक न्याय और समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल हो सकती है। कोर्ट ने BCI को निर्देश दिया कि वह इस सुझाव पर विचार करते हुए यदि आवश्यक हो तो एक समुचित योजना तैयार करे, जिससे जरूरतमंदों को राहत मिल सके और देश भर में कानूनी शिक्षा और न्यायिक सेवा की पहुंच और अधिक समावेशी बन सके।
इस मामले में अगली सुनवाई की तिथि निर्धारित नहीं की गई है, लेकिन बार काउंसिल से अपेक्षा की गई है कि वह शीघ्र ही इस विषय पर विचार कर अपना रुख स्पष्ट करे। इस पहल को वकीलों के समुदाय और कानून छात्रों के बीच व्यापक समर्थन मिल रहा है।




